३१ जेष्ठ २०८१, बिहीबार

अलिबिदा ईद, ईदुल फित्रको प्रार्थना कहाँ कसरी गर्ने ?

एसीपी संवाददाता

४ जेष्ठ २०७७, आईतवार ०६:५९ मा प्रकाशित


अहिले बिश्वमा फैलिएको कोभिड १९ कोरोना भाइरसबाट फेलिएके महामारी का कारण नेपालगंजमा बिद्यमान रमजान सकिने बेलामा ईदको नमाज यस्तो अवस्थामा, सामाजिक दूरी कायम न गरेमा खतरनाक हुनेछ ।

हाम्रो ओल्मा जो ईदगाह र मस्जिदहरूमा उपस्थित छन्न उनीहरूले नमाज र इदुल फितरको प्रार्थना गर्नु पर्नेछ, सर्वसाधारणलाई उनीहरूको आफ्नै घरमा जोहार र नमाज पढ्न मनाउनु पर्ने प्रशासन सँग सहकार्य गर्दे घरमै नमाज ईदको अलाबिदाको नमाज कसरी पढ्ने लगाएतका बिषयमा सल्लाह गर्न जरुरी छ ।

बर्तमान परिस्थीतीमा आम व्यक्तिको जानकारीको लागि, मेराज अहमद हलवाईले समाजिक संजालमा पोस्ट गदैै अन्य ईस्लाम धर्मावलम्बीहरुमा अनुरोध गरेका छन् । ईस्लाममा हाम्रो ओल्मा कुरानले निश्चित रूपमा हदीसको प्रकाशमा मानिसहरूलाई सूचना प्रदान गर्ने छन् भनी भरोषा गरेका छन ।

अलबिदा ईदुल फित्र कि नमाजफिलहाल महामारी फैली हुई है अयसे हालात मे समाजिक दुरी कायम रखना होगा भिडभाड करना खतरनाक होगाईदगाह और मस्जिदो मे जो हमारे ओलमा मौजूद है उन्हे अलबिदा कि नमाज और ईदुल फित्र कि नमाज कायम करना होगा आम,अवाम को उनके ही घरो मे जोहर और नफ्ली नमाज पढने के लिये समझाना चाहिये ईद ,अलबिदा की नमाज कैसे किस तरह से पढना है इसकी जानकारी अलबिदा और इद से पहले तमाम तरिको से जानकारी कराना चहिये फिलहाल के लिये आम आवाम की जानकारी के लिये मै ये पोस्ट कर रहा हू बाकी तफसिल मे हमारे ओलमा कुरान हदीश की रौशनी मे आवाम तक जानकारी जरूर पहुचायेगें उम्मीद रखता हू तफसिल (3)नमाजे ईद कि फजीलत सवाब से सरफराजी अगर हमलोग लाकडाउन और तमाम मामलात कि वजा से नमाजे ईद कि जमात मे भी हाजरी से महरूम हो रहे हैं, मगर ये सिर्फ जिस्मानी हाजरी से मैहरूमी है क्योकि नियते हाजरी कि वजह से हम इन्दल्लाह वहा हाजिर हैं और हमें वहां हाजिरी का पूरा सवाब भी मिल रहा है ,अब इसके साथ हम घर मे भी नमाज़े ईद के बाद कुछ इबादत करलें, तो हमारा सवाब इन्शाअल्लाह दोबाला हो जायेगा ,

1.दुर्रे मुख्तार और बहारे शरिअत मे है कि,नमाजे ईद के बाद चार रकात नफ्ल नमाज घर में पढना मुस्तहब है ,यू भी चासश्त के वक्तमे चार रकात नमाज पढने की अहादीसे नब्विया मे बडी फजीलत आई है ,लिहाजा नमाजे ईद के बाद ये चार रकात हमलोग अपने अपने घरो में अहलेखाना के साथ जरूर पढलें ,घरमे कोइ इमाम हो, तो मुख्तसर जमात कर सकते हैवरना तन्हा तन्हा पढे, कि शरिअत को ये नमाज तन्हा तन्हा महबूब है,ये भी अख्तियार है कि आप घरमे दो ही रकात पढे, कि ये भी मन्दूब है ,मगर चार रकात की फजिलत दो रकात से बहरहाल जियादा होगी यहा भी तफसिले बाला के मुताबिक जमात से या तन्हा तन्हा पढ सकते है

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