५ असार २०८३, शुक्रबार

होली वाईन का नशा, लग गया दशा !

एसीपी संवाददाता

१ श्रावण २०७७, बिहीबार ११:३३ मा प्रकाशित


राम कुमार दीक्षित

किसी भी देश का प्रधानमंत्री न केवल एक राजनैतिक समूह का या न ही एक ही बिचारधारा का नेतृत्व करता है । वह देश के सभी नागरिकों का अभिभावक, संरक्षक एवं प्रेरणा का श्रोत होता है । प्रत्येक नागरिक का सम्मान, पहिचान स्वाभिमान का संवाहक होता है।

अयोध्या और राम निर्बिवाद बिषय है, बिभिन्न पौराणिक, बैज्ञानिक एवं पुरातात्विक तथ्यों के आधार पर भारतीय सर्वोच्च अदालतने अयोध्या मे ही राम जन्म भूमि होने की पुष्टि की है । ऐसी अवस्था में प्रधानमन्त्रीका अबिवेकी बयान बाजी निश्चित ही उनके बुद्धिहीनता को पुष्टि करता है । होलीवाईन का नशा उतरते उतरते बहुत देर हो चुकी होगी और “सीताराम सीताराम कहिये, जेहि बिधि राखे राम तेहि बिधि रहिये” भजन गाते नजर आयेंगे हमारे प्रधानमन्त्री जी ।

प्रधानमंत्री का क्रियाकलाप अनुकरणीय होना चाहिए । इटली के प्रधानमंत्री को हम उदाहरण के रूप में प्रस्तुत कर सकते हैं । ‌हमारे प्रधानमंत्री जी नेपाल का प्रधानमंत्री बनने में असफल रहे । वह केवल एक राजनैतिक समूह के प्रमुख की भूमिका निभाने में कामयाब रहे। भ्रष्टाचार को बढ़ावा एवं भ्रष्टाचारियों का संरक्षण ही उनका प्रमुख जिम्मेवारी रहा है ।

कोरोना जैसे महासंकट के समय में एक ओर लोग बिना उपचार के दम तोड रहे हैं, क्वारेन्टीन में लोग भूंखे दिन काटने को बाध्य है, स्वास्थ्य अवस्था नाजुक हैं, ऐसे महासंकट के समय में नागरिकों के सर्बोत्तम हित का काम करने के बजाय कोरोना के नाम पर ब्रम्हलूट को बढ़ावा दिया। पूरे देश का ध्यान कोरोना एवं असफल प्रधानमंत्री पर था । सत्ता पर संकट आ चुका था इसी बीच उन्होंने राष्ट्रवाद नामक अन्तिम हथियार प्रयोग किया । और आम नागरिकों का ध्यान देश के महासंकट से हटाकर नकली  राष्ट्रवाद के तर्फ मोडने मे सफल रहे । अनाब सनाब बच्चों की तरह बयान बाजी किया और राम का मुद्दा उसी राष्ट्रवाद का नवीनतम् कड़ी है ।

परम्परागत रुपसे बाल्मीकी आश्रम का मान्यता प्राप्त स्थल चितवन जिला के ठोरी नामक स्थान को  सन् १९६५ में नेपाल भारत दोनों देशों की पुरातत्वविदों की संयुक्त टीम ने प्राचीन बाल्मीकि आश्रम होने को प्रमाणित किया है । ठोरी में लव कुश का जन्म और सीता के जीवन का अन्तिम समय व्यतीत हुआ था । यह स्थान ऐतिहासिक एवं धार्मिक दृष्टि से अति महत्त्वपूर्ण है । नेपाल भारत सीमा से नजदीक रहा इस स्थान पर सीता का धरती में प्रबेश स्थल,  अश्वमेघ यज्ञ के घोड़े को पकड़ने का स्थान, लव कुश के शिक्षार्जन का स्थान, पानी पीने का पुराना कुंआ लगायत अन्य धार्मिक एवं पुरातात्विक अवशेष आज भी विद्यमान है ।

राम का जन्मभूमि, सीता का जन्मभूमि, बाल्मीकि आश्रम सीता का धरती में प्रबेश लगायत धार्मिक तथ्य तथा नेपाल भारत का सांस्कृतिक सम्बन्ध को पूरा बिश्व स्वीकार चुका है और युगों युग से यह एक परम्परा बनकर बैज्ञानिक तथ्य के आधार पर लोगों के अन्तर्मन को भेद चुका है, ऐसी अवस्था में राम और अयोध्या के बिषय में अनावश्यक रूप में प्रधानमंत्री जैसे ब्यक्ति के द्वारा भ्रामक टिप्पणी निश्चित रूप से आस्था पर गम्भीर आक्रमण है,  निंदनीय एवं खेदजनक है । भारतीय प्रधानमंत्री को जनकपुर में बुलाकर संयुक्त रूप से रामायण सर्किट का उद्घाटन करना फिर जानाजान तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर पेश करना प्रधानमंत्री के स्तर का काम नहीं है ।

होलीवाइन के नशे में राम और अयोध्या को छूकर प्रधानमंत्री हास्यास्पद पात्र के रूप में चित्रित हो चुके है । अयोध्या और राम निर्बिवाद बिषय है, बिभिन्न पौराणिक, बैज्ञानिक एवं पुरातात्विक तथ्यों के आधार पर भारतीय सर्वोच्च अदालतने अयोध्या मे ही राम जन्म भूमि होने की पुष्टि की है । ऐसी अवस्था में प्रधानमन्त्रीका अबिवेकी बयान बाजी निश्चित ही उनके बुद्धिहीनता को पुष्टि करता है । होलीवाईन का नशा उतरते उतरते बहुत देर हो चुकी होगी और “सीताराम सीताराम कहिये, जेहि बिधि राखे राम तेहि बिधि रहिये” भजन गाते नजर आयेंगे हमारे प्रधानमन्त्री जी ।

परराष्ट्र मंत्रालय के स्टेटमेंट ने तो प्रधानमंत्री को और नंगा कर दिया है । अब राम के नाम का मंत्र प्रधानमंत्री के सत्ता का आयु बढ़ाने में सहायक नहीं हो सकता । प्रधानमंत्री खड्ग प्रसाद ओली को अपने त्रुटिपूर्ण बयान को सुधारना चाहिए और उनके बयान से आम जन समुदाय के भावना को ठेस पहुंचने के कारण आम जन समुदाय से माफी मांगनी चाहिए अन्यथा होलीवाईन का नशा के.पी.ओली का दशा बनसक्ता है । शुभ सन्ध्या ।
लेखकको निजी बिचार हो ।

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