१३ असार २०८३, शनिबार
“नजर टिकी है सबकै अब ” प्रधानिम
” नजर टिकी है सबकै अब “,
चौराहे पय चलत ही चरचा
धुंआधार परधानी कै
नजर टिकी है सबकै अब
पोखरा कै खटकत पानी पय
जात पात का लयिकय जूझैं
तू तू मैं मैं सांझ सकार
पनवारिन कै गजब कमाई
बीरै बीरा पान पुकार
हबर हबर कस खात हैं किरिया
मैहर के महरानी कै
नजर टिकी है…………..
पहिल पेज अकबार कै देखैं
हेडलाइन पय मचै गोहर
जेहका तनिका नीबर देखैं
जुरतै छोरि लिययं अखबार
बइठ बुढापम् जंखयं नेता
कयि कै दिन याद जवानी कै
नजर टिकी है ………….
रोज खबर मिल जाय इलाकक्
अवधी के चउराहे पय
कहूं समरथक कहुं आलोचक
जीवन के दुयिराहे पय
तनिकौ न घबरायौ भैयवा
दुनिक् राम कहानी से
नजर टिकी है सबकै अब
पोखरा के खटकत पानी पय ( संजय अवधी , गोंडा )
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