६ भाद्र २०८३, शनिबार

आत्म परिचय: नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान

एसीपी संवाददाता

६ भाद्र २०८३, शनिबार १७:२५ मा प्रकाशित

बहुआयामी सामाजिक, साहित्यिक एवं पत्रकारिता व्यक्तित्व
जन्मतिथि: 23 नवंबर 1968
पिता: श्री जगदीश सिंह चौहान
माता: श्रद्धेय स्व. रामेश्वरी सिंह चौहान
निवास: जंगलवा, रामपुर देवरई, बख्शी का तालाब, लखनऊ–226201, उत्तर प्रदेश
शैक्षिक योग्यता: स्नातक, क्रिश्चियन डिग्री कॉलेज, लखनऊ विश्वविद्यालय
वर्तमान परिचय: स्वतंत्र पत्रकार, अवधी आराधक एवं समाजसेवी
1. पत्रकारिता : चार दशकों की सक्रिय एवं जनपक्षधर यात्रा
नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान ने 1992 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए लगभग चार दशकों की दीर्घ पत्रकारिता यात्रा पूरी की है। उन्होंने पत्रकारिता को केवल समाचार लेखन तक सीमित न रखकर सामाजिक सरोकारों, लोकजीवन और जनसमस्याओं को अभिव्यक्ति देने का माध्यम बनाया।
उनकी प्रमुख पत्रकारिता सेवाएं—
स्वतंत्र भारत — 01 सितंबर 1992 से 15 दिसंबर 1998
हिन्दुस्तान — 16 दिसंबर 1998 से 03 नवंबर 2012
कल्पतरु एक्सप्रेस — 04 नवंबर 2012 से 10 मई 2015
इसके अतिरिक्त पाञ्चजन्य, सौम्य भारत, न्यूज वॉच, विश्ववार्ता, लोकसदन, दैनिक जागरण, एनबीटी, ग्राम टुडे, अवध ज्योति, जनसत्ता सहित अनेक प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में उनके आलेख, कविताएं, कहानियां, हास्य-व्यंग्य एवं अन्य रचनाएं प्रकाशित होती रही हैं।
वे वर्तमान में ‘अवध ज्योति’ त्रैमासिक पत्रिका के सह-संपादक तथा ‘न्यूज वॉच’ मासिक समाचार पत्रिका के उत्तर प्रदेश प्रमुख भी हैं।
2. आकाशवाणी एवं दूरदर्शन से जुड़ाव
नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान का लेखन और पत्रकारिता केवल मुद्रित माध्यम तक सीमित नहीं रहा।
वे आकाशवाणी लखनऊ के वार्ताकार तथा दूरदर्शन लखनऊ के विषय विशेषज्ञ के रूप में विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और समसामयिक विषयों पर अपनी सहभागिता दर्ज करा चुके हैं।
प्रथम एवं द्वितीय विश्व योग दिवस के अवसर पर दूरदर्शन द्वारा उनके सामाजिक एवं योग संबंधी कार्यों पर आधारित डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘योग की कहानी–बीकेटी की जुबानी’ प्रसारित की गई।
3. अवधी भाषा, साहित्य एवं लोकसंस्कृति के आराधक
अवधी भाषा और लोकसंस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान पिछले कई दशकों से निरंतर सक्रिय हैं।
उन्होंने अवधी को केवल साहित्य की भाषा न मानकर लोकजीवन, लोकसंवाद और सामाजिक चेतना की भाषा के रूप में प्रतिष्ठित करने का प्रयास किया है।
उनकी लेखन विधाओं में—
आलेख
वार्ता
कविता
कहानी
नाटक
यात्रा-वृत्तांत
हास्य-व्यंग्य
प्रमुख हैं।
उनका चर्चित साप्ताहिक स्तंभ ‘चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से’ लोकभाषा के माध्यम से सामाजिक विसंगतियों और जनजीवन के विविध पक्षों को सामने लाता है।
वे ‘परपंचु—लोकभाषाओं को समर्पित ऑनलाइन बतकही’ के संयोजक एवं संचालक हैं, जिसके माध्यम से लोकभाषाओं और लोकसंस्कृति को डिजिटल मंच से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
4. उत्तर प्रदेश विधानसभा में अवधी–हिन्दी के प्रथम दुभाषिया
उनके बहुआयामी योगदान का एक विशिष्ट पक्ष यह है कि वे उत्तर प्रदेश विधानसभा सदन में प्रथम अवधी–हिन्दी दुभाषिया के रूप में भी अपनी भूमिका निभा चुके हैं।
यह कार्य अवधी भाषा को संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक विमर्श से जोड़ने की दिशा में उनकी विशिष्ट उपलब्धि है।
5. योग के माध्यम से स्वस्थ समाज का अभियान
नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान ने योग को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से ‘स्वस्थ बीकेटी–सुन्दर बीकेटी अभियान’ की स्थापना की और इसके संस्थापक अध्यक्ष के रूप में कार्य किया।
लगातार पांच वर्षों तक संचालित निःशुल्क योग शिविरों एवं जनजागरण अभियानों के माध्यम से उन्होंने लगभग 16,000 लोगों को योग का प्रशिक्षण प्रदान किया।
उनका प्रयास योग को केवल व्यक्तिगत साधना न मानकर स्वस्थ परिवार और स्वस्थ समाज के निर्माण का माध्यम बनाना रहा।
6. नशामुक्त समाज के लिए व्यापक जनजागरण
नशे के विरुद्ध उनका अभियान उनके सामाजिक जीवन का अत्यंत महत्वपूर्ण पक्ष है।
नशामुक्त समाज आंदोलन के प्रांतीय संयोजक के रूप में उन्होंने पिछले चार वर्षों में लखनऊ, सीतापुर, बाराबंकी, हरदोई और जौनपुर के विभिन्न विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में जाकर लगभग 1.50 लाख विद्यार्थियों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया।
इस अभियान के माध्यम से लगभग 3,500 लोगों को नशामुक्त जीवन की ओर प्रेरित एवं सहयोग प्रदान किया गया। उनका लक्ष्य विशेष रूप से युवा पीढ़ी को नशे से बचाकर स्वस्थ, जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बनाना रहा है।
7. महिला सशक्तीकरण एवं खेल के क्षेत्र में योगदान
महिला प्रतिभाओं को मंच और अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उन्होंने महिला कबड्डी लीग ‘हमसे न लो पंगा’ की स्थापना की तथा इसके संस्थापक अध्यक्ष के रूप में कार्य किया।
इस पहल के माध्यम से महिला खिलाड़ियों को खेल के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का अवसर देने का प्रयास किया गया।
महिला एवं बाल विकास के प्रति उनकी सक्रियता छात्र जीवन से ही रही है।
8. सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध जनजागरण
नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान लंबे समय से सामाजिक कुरीतियों, नशाखोरी और अस्वस्थ सामाजिक प्रवृत्तियों के विरुद्ध जनजागरण करते रहे हैं।
वे समाज के कमजोर एवं जरूरतमंद वर्ग के लोगों की सहायता को अपना सामाजिक दायित्व मानते हैं।
उनकी सामाजिक गतिविधियों का मूल उद्देश्य है—
जागरूक समाज, स्वस्थ समाज और संस्कारित समाज का निर्माण।
9. सामाजिक संस्थाओं के निर्माण एवं नेतृत्व में भूमिका
उनके प्रमुख संस्थागत दायित्व—
रामेश्वरी जगदीश योगक्षेम ट्रस्ट, उत्तर प्रदेश — संस्थापक अध्यक्ष
महिला कबड्डी लीग ‘हमसे न लो पंगा’ — संस्थापक अध्यक्ष
स्वस्थ बीकेटी–सुन्दर बीकेटी अभियान — संस्थापक अध्यक्ष
नशामुक्त समाज आंदोलन — प्रांतीय सह संयोजक
लखनऊ कनेक्शन वर्ल्डवाइड ग्रुप — सक्रिय सदस्य
परपंचु—लोकभाषाओं को समर्पित ऑनलाइन बतकही — संयोजक एवं संचालक
10. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान
लगभग चार दशकों की सामाजिक, साहित्यिक, पत्रकारिता एवं सांस्कृतिक सक्रियता के दौरान उन्हें विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक एवं शैक्षिक संस्थाओं द्वारा अनेक सम्मान प्राप्त हुए।
विशेष रूप से—
नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान, काठमांडू, नेपाल की सर्वोच्च साहित्यिक-सांस्कृतिक संस्था तथा महात्मा बुद्ध की जन्मस्थली स्थित लुम्बिनी विश्वविद्यालय द्वारा उन्हें अवधी साहित्यकार के रूप में सम्मानित किया गया। अभी अगस्त, 2026 में नेपालगंज (नेपाल) स्वामी तुलसीदास जयंती पर उन्हें अवधी साहित्यकार एवं पत्रकार के रूप में सम्मानित किया गया।
उत्तर प्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल श्री राम नाईक द्वारा उन्हें योग साधक एवं महिला कबड्डी आयोजक के रूप में दो बार सम्मानित किया गया।
11. परिवार की उपलब्धि से जुड़ा विशिष्ट प्रसंग
उनकी पुत्री काव्यांजलि सिंह चौहान ‘वन्या’ के योग संबंधी जीवन एवं उपलब्धियों पर आधारित पाठ ‘योग की गुड़िया वन्या’ सीबीएसई की हिन्दी पाठ्यपुस्तक ‘नव किसलय’ में शामिल किया गया है।
यह उपलब्धि योग, बाल प्रतिभा और परिवार की सामाजिक-सांस्कृतिक सक्रियता के एक प्रेरक उदाहरण के रूप में उल्लेखनीय है।
12. बहुआयामी व्यक्तित्व का सार
नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान का सार्वजनिक जीवन किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। वे एक साथ पत्रकार, लेखक, अवधी भाषा-साहित्य के साधक, लोकभाषा के संवाहक, योग प्रशिक्षक, नशामुक्ति अभियानकर्ता, महिला खेल आयोजक और समाजसेवी के रूप में सक्रिय रहे हैं।
उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उन्होंने अपने विभिन्न कार्यक्षेत्रों को एक-दूसरे से जोड़ा है—
पत्रकारिता को जनजागरण से,
साहित्य को लोकभाषा से,
अवधी को लोकसंस्कृति से,
योग को स्वास्थ्य से,
खेल को महिला सशक्तीकरण से और
नशामुक्ति अभियान को युवा संरक्षण से।
चार दशकों से अधिक समय से निरंतर सक्रिय रहते हुए उन्होंने अपने क्षेत्र की जनता के बीच रहकर कार्य किया है। उनका योगदान किसी एक आयोजन या अल्पकालिक अभियान तक सीमित न होकर दीर्घकालिक सामाजिक प्रतिबद्धता का उदाहरण है।
नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान की दीर्घकालिक पत्रकारिता सेवा, अवधी भाषा एवं लोकसंस्कृति के संरक्षण-संवर्धन, योग के जनप्रसार, नशामुक्ति के व्यापक जनजागरण, महिला खेलों के प्रोत्साहन, सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध अभियान तथा वंचित एवं जरूरतमंद वर्ग के प्रति निरंतर सामाजिक सरोकारों को देखते हुए उनका व्यक्तित्व श्रेष्ठ है।
———
लखनऊ
21 अगस्त, 2026

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